Monday, August 30, 2021

आपको सपरिवार श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

 

5125 वर्ष पहले बीत गया द्वापर ,,,
भगवान कृष्ण का लीला युग !
महाभारत जैसे महाग्रन्थ का जीता जागता संसार ,,,
एक से बढ़कर एक महारथियों , महाप्रतापियों और वीरों की कथा गाथा सुनाता काल प्रवाह ,,,
हे सुदर्शन चक्रधारी मायावी श्रीकृष्ण !
दो आंखों से पूरा समर चुपचाप देखते बब्रुवाहन ,,,
शरशैय्या पर लेटे गंगापुत्र भीष्म ,,,
छल कपट भरा द्यूत करते दुर्योधन ,,,
पढ़े हुए सिद्ध पासे फेंकते शकुनि ,,,
अंधे धृतराष्ट्र !
और महावीरों के रक्त से काल का खप्पर भरती द्रौपदी !
हाँ , द्वापर ,, वही द्वापर !
जेल में यातना भोगते देवकी वसुदेव !
कोख से अजन्में पुत्र की लीलाओं का आनंद लेते नंद यशोदा ,,,
रास रचाती बरसाने की राधा !
गोप और ग्वाले !
बृज की वह पावन धरती बृज भूमि ,,,
मथुरा में यमुना के तट ,,,
भादौं कृष्ण अष्टमी !
विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण का धरती पर आगमन ,,, प्रादुर्भाव ! अवतरण !
आज वही दिन है । श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी । देशभर में घरों में बनेंगे ठाकुरडोल । पालने में झूलेंगे यशोदा के लाला । दिनभर व्रत रखकर भारतवासी मनाएंगे जन्मोत्सव । बंदिशों के चलते भले ही घरों पर ,,, पर हर आंगन में हर चौखट पर !
सम्पूर्ण कलाओं और लीलाओं के पूर्ण अवतार थे कृष्ण । श्रीराम के तरह वे मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं थे । उन्होंने अपने नियम स्वयं गढ़े , रास्ते स्वयं चुने । वे खुद सीमाओं में बंधे नहीं , हाँ वक्त और तमाम ग्रह उनके इशारों पर बंधे । कृष्ण के अपने नियम थे , अपने कानून । वे भक्तवत्सल थे , चतुरसुजान भी , पर नीतिवान भी । वे पूर्ण पुरुष थे , करुणानिधान भी । वे खुद अलौकिक थे पर माखन चुरैया भी । वे रण चितेरे थे पर बंसी बजैया भी । वे गोपियों के मितवा थे , पर जगत रखैया भी ।
पर वे थे कहाँ ? वे तो हैं । चारों युग पार न पावैं जब बृजनंदन पार लगावैं । वे कृष्ण कन्हैया हैं , चितचोर हैं । ठहरे तो रुके रहे , चल पड़े तो फिर मुड़े नहीं । जहां से चल दिये , फिर लौटे नहीं । राधा के हो गए पर राधा के हुए नहीं । रुक्मणि को ले चले पर रुक्मण से बंधे नहीं ।
उन्हीं गिरिधर मुरलीधर का आज जन्मोत्सव । बधाइयां दीजिये भी लीजिये भी । गीता के सूत्रधार भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाइए । इस पावन भारतभूमि को फिर से बृज धूलि से सजाइये । नंद के नटखट लाला को पालने झुलाइये ।
तुम दिगन्त हो हे कृष्ण
गोपाला हो नंदलाला हो
तुम अनंत हो हे कृष्ण
आज फिर आओ
बड़े संकट में हैं धरतीवासी
चारों ओर मच रहा हाहाकर
सिसक रही मानवता
डरा रही दानवता
कृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं स्वीकारिए
प्रार्थना कीजिये कि
अत्याचारियों के दमन को
इस धराधाम पर वे फिर आएं

~ Kaushal Sikhaula जी की फेसबुक वाल से

Thursday, August 26, 2021

यूपी बोर्ड की "अंक सुधार परीक्षा" (Improvement Exam) के लिए 27 अगस्त तक करें आवेदन

यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं रिजल्ट 2021 में प्राप्त अपने नंबरों से असंतुष्ट विद्यार्थी "अंक सुधार परीक्षा" (Improvement Exam) में शामिल होने के लिए 27 अगस्त 2021 तक फॉर्म जमा सकते हैं| माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश के अनुसार 10वीं व 12वीं के विद्यार्थी एक या एक से अधिक विषय में अंक सुधार के लिए होने वाली परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं| परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्र-छात्राएं यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in के जरिए आवेदन फॉर्म डाउनलोड करें और फिर उसे सबमिट करें|

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 10वीं और 12वीं रिजल्ट से असंतुष्ट विद्यार्थियों के लिए बोर्ड की ओर से अंक सुधार परीक्षा का आयोजन 18 सितंबर 2021 से 6 अक्टूबर 2021 तक किया जाएगा|

इस बार कोरोना मामलों के कारण उत्तर प्रदेश सरकार ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर पास किया गया है| इस परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों को कोई परीक्षा शुल्क नहीं देना पड़ेगा|

परीक्षा में शामिल होने के लिए 10वीं व 12वीं के विद्यार्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन पत्र को डाउनलोड करें| उसे भरकर अपने संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य को 27 अगस्त शाम 5 बजे तक उपलब्ध कराएं| विद्यार्थियों की ओर से दिए गए आवेदन पत्र को स्कूल की ओर से बोर्ड की वेबसाइट पर 29 अगस्त 2021 रात 12 बजे से पहले अपलोड करना होगा| निर्धारित अंतिम तिथि के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा|

Monday, August 16, 2021

"लव जिहाद" पर बनी फिल्म "The Conversion" होगी सितम्बर 2021 में आपके सामने, ट्रेलर हुआ रिलीज़

 

Photo from YouTube

बॉलीवुड में एक सही मुद्दे पर फिल्म बनी है| नाम है - The Conversion. फिल्म निर्माताओं, निर्देशक और पूरी टीम बधाई की पात्र हैं| लव जिहाद जैसा मुद्दा इस देश को बर्बाद कर रहा है| सरकारें ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहीं हैं इस मुद्दे पर, ऐसे में इस फिल्म का आना समाज को कुछ हद तक जागरूक करेगा|
 
फिल्म सितम्बर 2021 में रिलीज़ होगी| इस फिल्म का ट्रेलर जारी हो चुका है| ट्रेलर देखकर फिल्म की कहानी का अंदाजा यह लगता है कि यह एक हिन्दू लड़की की कहानी है, जो ‘बबलू’ जैसे हिन्दू नाम वाले एक मुस्लिम लड़के से प्यार कर बैठती है। वह अपने परिवार के विरुद्ध जाकर उससे शादी करती है लेकिन शादी के बाद उसके साथ बुरा बर्ताव किया जाता है। वह लड़की अपने मुस्लिम पति के चंगुल से छूटकर हिन्दू लड़कियों को इस धोखे और साजिश से बचाने का बीड़ा उठाती है।
 
 
 
समुदाय विशेष की सच्चाई सामने आने पर फिल्म का विरोध होना स्वाभाविक है| लेकिन इस तरह की सच्चाई को दर्शाती फ़िल्में अवश्य बननी चाहिए| इसलिए ऊपर इस फिल्म का ट्रेलर दिया हुआ है| ट्रेलर देखिये, सफल बनाइये और फिल्म आने पर फिल्म को भी सफल बनाइये|

Friday, July 4, 2014

आखिर वह "शहर" बन गया

मेरे शहर का मौसम बदल गया है | पहले जो मेरा मोहल्ला होता था, वह अब 'कालोनी' है | पहले यहाँ के बच्चे अपने मोहल्ले के मिश्रा चाचा,  सरोज चाची, गप्पू भैया और रामेसर काका इत्यादि को हाथ की ऊँगली की तरह पहचानते थे, लेकिन अब बगल वाले घर में कौन-सा परिवार रहने आया है, हम नहीं जानते? महज १०-१२ साल पहले तक, जब इस मोहल्ले के किसी लड़के को गुटखा भी खाना होता था तो वह छिपकर जाता था | अब इसी कालोनी की चौक पर जाम टकराए जाते हैं-खुलेआम | हमारे इस मोहल्ले में एक पुराना मंदिर था | आस्था की छोड़िये, वह सामाजिक गतिविधियों का केंद्र भी था | वहां अब दो-चार जुआ खेलने वालों के अलावा कोई नहीं जाता | मंदिर के ठीक सामने का पोखर आधा भर दिया गया है और सबकी मौन सहमति से बाकी बचे को पूरी कालोनी का कूड़ेदान बना दिया गया है | पोखर की आसपास  की जमीन के टुकड़ों की प्लोटिंग कर उसपर अट्टालिकाएं खड़ी हो गयी हैं | जिस मैदान की छाती को कूटकर ये इमारतें बनायीं गयीं हैं, वही कहीं हमारा बचपन भी दफन है | अब मोहल्ले के लड़कों को खेलने के लिए मैदान नहीं मयस्सर हैं | वैसे अब इसकी जरुरत भी नहीं | ज्यादातर घरों में केवल बूढ़े ही बच गए हैं, जवान अपने बच्चों सहित दिल्ली-मुंबई- निकल गए हैं | हमारा शहर अब सचमुच शहर हो गया है | यहाँ तीन मॉल खुल गए हैं | अपार्टमेंट संस्कृति आ गयी है | जहाँ भूले-भटके अपराध की घटनाएँ होती थीं, अब वे रोजाना की बातें हैं | शहर बड़ा 'हैपनिंग' हो गया है |
~ जनपथ में व्यालोक 

Tuesday, May 27, 2014

पर्यावरण का संकट

प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से विश्व में पर्यावरण को संकट उत्पन्न हो गया है। स्वस्थ समाज के लिए साफ वातावरण जरूरी है लेकिन कुछ साल से लोग विकास की अंधी दौड़ और अत्याधुनिक संसाधनों की होड़ में पर्यावरण के महत्व व जीवन में इसकी जरूरत को भूल रहे हैं। हिमाचल के दूरदराज के क्षेत्र जहां कुछ लोग ही पहुंच पाते थे, वहां आज वाहनों की रेलमपेल है। नतीजतन उन पहाड़ी क्षेत्रों में प्रदूषण स्तर बढ़ना चिंताजनक है। रोहतांग को धरती का स्वर्ग समझा जाता था, लेकिन वहां की बर्फ पर प्रदूषण के दाग नजर आने लगे हैं। स्वच्छ वायु मानव जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है और इसके अभाव में जीवन का संकट उत्पन्न हो जाता है। ऐसे में अगर हम पर्यावरण संरक्षण के प्रति समय रहते जागरूक नहीं हुए तो धरती पर जीवन का संकट में आना तय है। आंकड़े बताते हैं कि 2050 तक वातावरण में इतना जहर फैल चुका होगा कि हर साल करीब 36 लाख लोग काल के ग्रास बनेंगे। इन आकंड़ों में इस बात का भी जिक्र है कि वायु प्रदूषण का सबसे अधिक असर भारत व चीन जैसे देशों में देखने को मिलेगा। इस बीच पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर कुल्लू जिला प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदम सराहनीय हैं। इसके तहत रोहतांग दर्रे पर पर्यटन से संबंधित सभी गतिविधियां नियंत्रित की जाएंगी। दस साल से पुराने वाहन वशिष्ट से आगे नहीं जा पाएंगे। वशिष्ट में सभी वाहनों की प्रदूषण जांच होगी। रोहतांग जाने के लिए वाहन चालकों को जिला प्रशासन से विशेष परमिट लेना होगा। वशिष्ट से आगे चार साल पुराने स्नो कटर भी नहीं जा पाएंगे। मढ़ी में ईको फ्रेंडली मार्केट का निर्माण किया जाएगा। नि:संदेह यह कदम पर्यावरण संरक्षण के लिए अहम है लेकिन इन्हें सही तरह से अमल में लाया जाना चाहिए। इसमें किसी तरह की कोताही न बरती जाए। अगर थोड़ी सी भी ढील दी गई तो सारे प्रयास व्यर्थ हो जाएंगे। यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदूषण जांच केंद्र में काम सही तरीके से हो। प्रशासन को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मर्म को गंभीरता से समझना होगा और सही मायने में प्रदूषण रोकने के लिए आगे आना होगा। इसके लिए संबंधित पक्षों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्हें समझना होगा कि इस निर्देश का पालन कर वे सिर्फ अपनी ड्यूटी नहीं बल्कि भविष्य के लिए लिए प्रयास कर रहे हैं ताकि लोग स्वस्थ जीवन जी सकें।
~ साभार - जागरण - हिमाचल प्रदेश 

Monday, March 3, 2014

सेना के आधुनिकीकरण पर सोयी घोटालेबाज़ UPA सरकार

चीन के आक्रामक रुख, पाकिस्तान की गुस्ताखियों के बावजूद सेना के आधुनिकीकरण के लक्ष्य को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया | नतीजा यह हुआ कि हादसे दर हादसे पेश आने लगे| एक नयी मीडिया रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि नौसेना ने 2010 में ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर आगाह कर दिया था कि पनडुब्बियों का बेड़ा खत्म होता जा रहा है| मौजूदा पनडुब्बिया भी बेहद जर्जर हैं| पत्र में नौसेना ने यह भी चेताया था कि 2015 तक पनडुब्बियों की तादाद 5-6 रह जाएगी | पनडुब्बियों में सामने आ रहीं गड़बड़ियों का भी इसमें उल्लेख किया गया था | हथियारों की खरीद की जटिल प्रक्रिया, घूसखोरी ने भी सेना को सामरिक मोर्चे पर कमजोर किया है और उसकी साख पर भी सवाल उठे हैं| भारतीय सेनाएं अभी भी ज्यादातर सोवियत युग में खरीदे गये लड़ाकू विमानों और टेंकों पर ही निर्भर हैं| भ्रष्टाचार और लालफीताशाही ने रक्षा खरीद और सैन्य आधुनिकीकरण के लक्ष्य को पटरी से उतार दिया है|

पुरानी पड़ती पनडुब्बिया 

  • 2010 में नौसेना ने नयी पनडुब्बियों की लगायी थी गुहार
  • 2015 तक 5-6 पनडुब्बिया ही रह जाने की बात कही 
  • पुरानी पनडुब्बियों कि गड़बड़ियों को लेकर भी चेताया 
  • सात माह में पनडुब्बी के तीन और पोत के सात हादसे 
स्कोर्पीन पनडुब्बी 
  • 2005 में हुआ था स्कोर्पीन के भारत में निर्माण का करार 
  • 2012 में मिलनी थी छह में से पहली फ़्रांसिसी पनडुब्बी 
  • 2016 में मिलेगी अब पहली पनडुब्बी भारत को 
  • 18,798 करोड़ से 24 हज़ार करोड़ पहुंची लागत 
राफेल सौदा 
  • 126 लड़ाकू विमानों का राफेल सौदा 
  • 15 अरब डॉलर के सौदे पर जनवरी 2012 में करार 
  • 2014 में भी सौदे के लिए बजट आवंटन नहीं हुआ 
  • मिग-15 की जगह स्वदेशी फायेटरों का काम 15 साल पीछे 
घोटाले पर घोटाले 
  • 3600 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में घूसखोरी
  • ट्रक की खरीद में घोटाला
  • बराक मिसाइलों में घूसखोरी मामला
  • 1987 का बोफोर्स घोटाला और 1999 का ताबूत घोटाला
  • आर्डिनेंस फैक्ट्री घोटाले में छह कम्पनियों पर लगी पाबन्दी 
लटके प्रोजेक्ट 
  •  01 लाख,78 हज़ार असाल्ट रायफलों का सौदा पूरा नहीं 
  • 50 आधुनिकीकरण स्कीमों में ज्यादातर 2013-14 में नहीं हुईं 
  • 16 मल्टीरोल मैरीटाइम और 56 यूटिलिटी हैलीकॉप्टरों की दरकार नौसेना में 
  • 100 सेल्फ प्रोपेल्ड गन, 814 गन सिस्टम और 1580 टो गनों का करार
  • 155 मिमी हावित्जर तोपें सेना को अभी तक नहीं मिल पायी हैं 
UPA सरकार की उदासीनता 
  • 12वीं पंचवर्षीय योजना में दो लाख करोड़ रुपये के 680 प्रोजेक्ट में ज्यादातर अधूरे 
  • जरुरत के मुताबिक हर साल रक्षा बजट नहीं बढाया गया 
  • रक्षा खरीद सौदों पर शीघ्र निर्णय में देरी से लागत बढ़ी 
  • चयन के मानकों, निविदा और गुणवत्ता जांच की धीमी प्रक्रिया 
  • हथियारों के निर्माण के स्वदेशीकरण का लक्ष्य औंधे मुहं गिरा
  • 2005 से आधुनिकीकरण की बाट जोह रही है वायुसेना
                                                                                                                     -source : Hindustan, New Delhi

Thursday, October 10, 2013

नवरात्र - नयी पीढ़ी के लिए जानकारी

सनातन धर्म में दो बार नवरात्र मनाये जाते हैं। अक्टूबर - नवम्बर में शारदीय नवरात्र और मार्च - अप्रैल में बासंतिक नवरात्र । नयी पीढ़ी के मन में बहुत सारे सवाल रहते हैं कि नवरात्र क्यूँ मनाये जाते हैं ? नवरात्र में पूजा का सही विधान क्या है ? व्रत रखें या नहीं? आदि आदि... मैंने इस तरह के सभी प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास किया है। आशा है , नयी पीढ़ी को पूर्ण जानकारी मिलेगी। यह जानकारी प्रतिष्ठित ज्योतिषी श्री डा. सुरेश चन्द्र मिश्र से बातचीत पर आधारित है ।

नवरात्र क्यों मानते हैं ?

एक साल में दो गोल संधियाँ होती हैं - (1) उत्तरायण - दक्षिणायन (2) उत्तर - दक्षिण| ये दो गोल संधियाँ मिलकर साल में चार पर्व-गांठ (जोड़ या संधि) हैं| इन गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र होते हैं | अब अगर आयुर्वेद के अनुसार  देखें तो इन गोल संधियों को आयुर्वेद में "यमराज के जबड़े" कहा जाता है जिसमे मौसम के अनुसार रोग आदि होने की सम्भावना सबसे ज्यादा होती है | इसलिए ऐसे मौसमों में तन-मन को स्वस्थ रखने के लिए व्रत रखने का विधान है |

नवरात्र नौ ही क्यों हैं?

मुह, नाक, कान, आँख, मूत्र और मलद्वार आदि मिलकर हमारे शरीर में नौ द्वार या छिद्र हैं, जिनके माध्यम से हमारा शरीर क्रियाशील है | अतः देर से पचने वाला, भारी, तमोगुणी भोजन छोड़कर कम मात्रा में भोजन का नियम बनाया गया है| हो सके तो एक समय फल, दूध, दही, और ऋषियों के अनाज जैसे श्यामाक चावल, कुट्टू, चौलाई, सिंघाड़ा आदि खाने का नियम बनाना चाहिए| इससे नौ द्वारों की शुद्धि होती है | इस तरह शरीर की शुद्धि को व्यक्तिगत तौर पर महत्त्व देने के लिए नौ दिन का महत्व दिया गया है | फिर इन नौ दिनों को नौ दुर्गाओं से जोड़ा गया है |

नवदुर्गा क्या हैं ?

हिंदी महीने के शुक्लपक्ष की पड़वा यानी पहली तिथि से नौवीं तिथि तक हर दिन को नौ देवियों से जोड़ा गया है| हर दिन की एक देवी यानी नौ द्वारों वाले किले या दुर्ग के भीतर बसने वाली जीवन शक्ति रुपी दुर्गा के नौ रूप हैं - शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंध्माता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री |
इसी प्रकार इन नौ देवियों का नौ जड़ी-बूटी या ख़ास व्रत की चीज़ों से भी सम्बन्ध है| यह चीज़ें नवरात्र के व्रत में प्रयोग की जाती हैं| यह चीज़ें - कुट्टू, दूध, दही, चौलाई, पेठा, श्यामाक चावल, हरी तरकारी, काली मिर्च, तुलसी, साबूदाना, आंवला आदि कुदरती और जंगल में पैदा होने व्रत खाद्य हैं|

व्रत क्यों रखें ?

शरीर को सुचारू रूप से रखने के लिए सफाई या शुद्धि तो हम रोजाना करते ही हैं लेकिन कभी इसके अंग-प्रत्यंगो की पूरी देखभाल करनी भी जरुरी है| इसके लिए हर छमाही पर व्रत रखकर भीतरी सफाई का अभियान चलाया जाता है| व्रत में सात्विक आहार से शरीर की शुद्धि, साफ़ शरीर में शुद्ध बुद्धि,  उससे बुद्धि में उत्तम विचार, अच्छे विचारों से उत्तम कर्म और कर्म से अच्छा चरित्र बनता है| 

यदि व्रत न रख सकें |

 व्रत संकल्प, प्रतिज्ञा, नियम, या प्रण का नाम है| यदि नौकरी आदि की दिनचर्या या अपने शरीर की स्थिति के कारण सारे व्रत न रख सकें तो सुबिधानुसार 9, 7, 5, 3 या 1 व्रत रख सकते हैं| यदि एक भी व्रत न रख सकें तो इन दिनों कम से कम शरीर के अधिक सुखभोग से बचें| जैसे - अच्छी बातें बोलें, खान-पान पर नियंत्रण रखें, किसी को गलत न बोलें या गलत न करें, मन में अच्छे विचार रखें, समय पर खाना-पीना और सोना |

यदि कन्याओं को भोजन न करा सकें |

अकेले रहने या काम के घंटों के कारण कन्याओं को पूरी विधि से बैठाकर भोजन कराना संभव न हो तो आप सुविधानुसार कन्याओं को तैयार भोज्य पदार्थों को भेंट कर सकते हैं |

Friday, July 5, 2013

केजरीवाल का 'ईमानदारी' सर्टिफिकेट

आजकल आप पार्टी के प्रमुख अरविन्द केजरीवाल एक समाजसेवी से राजनेता बनने का सपना देख रहे हैं | वैसे सपना देखना कोई गलत बात तो नहीं है| खैर, व्यक्तिगत तौर पर मैं उन्हें एक समाजसेवी के रूप में पसंद करता हूँ ,राजनेता के रूप में नहीं |
अभी कुछ दिनों से केजरीवाल का एक पोस्टर दिल्ली में चलने वाले कई सारे ऑटो के पीछे लगा हुआ है, जिसमें केजरीवाल को ईमानदार व दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भ्रष्ट दर्शाया गया है| मुझे बड़ा आश्चर्य होता है कि सारी ईमानदारी का ठेका केजरीवाल साहब के पास है | अपनी ईमानदारी का ढिंडोरा केजरीवाल साहब ऐसे पीटते हैं जैसे उन्हें ईमानदारी का सर्टिफिकेट मिला हुआ है| केजरीवाल ईमानदार हो सकते हैं लेकिन मैं यह जरुर जानना चाहूँगा कि केजरीवाल को ईमानदारी का प्रमाण पत्र कहाँ से और किस संस्था द्वारा दिया गया है ?
करोड़पतियों को अपनी पार्टी की तरफ से उम्मीदवार बनाने वाले केजरीवाल प्रचार-प्रसार पर किस तरह से खर्च कर रहे हैं,यह किसी से छिपा नहीं है | करोड़ो रुपया किस तरह वो अपने NGO के नाम पर कमा रहे हैं , यह अब लोगों को समझ आ रहा है |
केजरीवाल ने अपने को ईमानदार और दूसरी पार्टियों के नेताओं को भ्रष्ट बताने की फैक्ट्री खोल रखी है | लेकिन कुछ भी हो जनता को भी अब समझ आ गया है कि सिर्फ गाल बजाने से कुछ नहीं होता , काम भी करना पड़ता है |

Sunday, April 7, 2013

कांग्रेस, बीजेपी और PM उम्मीदवार


एक पुरानी कहावत है-"किसी को कुछ बोलने से पहले अपने गिरेवान में जरुर झांकना चाहिए|"
यह कांग्रेस पर फिट बैठती है|
कांग्रेस वाले कहते रहते हैं कि बीजेपी में PM पद को लेकर मारामारी है ,हर कोई PM बनना चाहता है|
लेकिन आज खुद कांग्रेस में यही स्थिति है|
कुछ कांग्रेसी राहुल को PM पद के लिए आगे करना चाहते हैं और कुछ आज भी मनमोहन को| और एक का नाम सुन कर तो आप हंसने लगेंगे-कुछ तो चिदम्बरम को PM देखना चाहते हैं|
कांग्रेस की स्थिति इतनी गंभीर है कि कभी राहुल गाँधी की बातों से लगता है कि वो PM बनना चाहते हैं और कभी वो खुद कहते हैं कि PM पद नहीं चाहिए| वो खुद बहुत confused हैं| और जो खुद confused हो वो देश क्या चलाएगा|
दूसरी तरफ मनमोहन सिंह ,उनकी तो बातें ही निराली हैं वो जो कहते हैं वो joke लगता है| अभी कुछ दिन पहले उन्होंने कह दिया कि वो PM पद के लिए न तो हाँ करते हैं और न ही मना करते हैं| लगता है राहुल के साथ रहते रहते वो भी confused हो गए हैं|
और चिदंबरम साहब पर वित्त मंत्रालय संभल नहीं रहा देश क्या संभालेंगे|
अब अगर यह PM पद का सवाल कान्ग्रेसिओं से पुछा जाये तो कहेंगे हमारे यहाँ इतने intelligent लोग हैं कि कोई भी PM बन सकता है |
अब उनको कौन समझाए यही स्थिति बीजेपी की है | यहाँ सब intelligent हैं और सब PM बनने योग्य हैं| और सबसे अच्छी बात यह है कि कोई भी कन्फ्यूज्ड नहीं है , न मोदी , न अडवानी, न सुषमा , न राजनाथ और न कोई और | सबके अन्दर क्षमता है PM बनने की |
इसलिए कांग्रेस को अब अपनी स्थिति का ध्यान रखते हुए यह नहीं बोलना चाहिए कि बीजेपी में PM पद के कई उम्मीदवार हैं |