5125 वर्ष पहले बीत गया द्वापर ,,,
भगवान कृष्ण का लीला युग !
महाभारत जैसे महाग्रन्थ का जीता जागता संसार ,,,
एक से बढ़कर एक महारथियों , महाप्रतापियों और वीरों की कथा गाथा सुनाता काल प्रवाह ,,,
हे सुदर्शन चक्रधारी मायावी श्रीकृष्ण !
दो आंखों से पूरा समर चुपचाप देखते बब्रुवाहन ,,,
शरशैय्या पर लेटे गंगापुत्र भीष्म ,,,
छल कपट भरा द्यूत करते दुर्योधन ,,,
पढ़े हुए सिद्ध पासे फेंकते शकुनि ,,,
अंधे धृतराष्ट्र !
और महावीरों के रक्त से काल का खप्पर भरती द्रौपदी !
हाँ , द्वापर ,, वही द्वापर !
जेल में यातना भोगते देवकी वसुदेव !
कोख से अजन्में पुत्र की लीलाओं का आनंद लेते नंद यशोदा ,,,
रास रचाती बरसाने की राधा !
गोप और ग्वाले !
बृज की वह पावन धरती बृज भूमि ,,,
मथुरा में यमुना के तट ,,,
भादौं कृष्ण अष्टमी !
विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण का धरती पर आगमन ,,, प्रादुर्भाव ! अवतरण !
आज वही दिन है । श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी । देशभर में घरों में बनेंगे ठाकुरडोल । पालने में झूलेंगे यशोदा के लाला । दिनभर व्रत रखकर भारतवासी मनाएंगे जन्मोत्सव । बंदिशों के चलते भले ही घरों पर ,,, पर हर आंगन में हर चौखट पर !
सम्पूर्ण कलाओं और लीलाओं के पूर्ण अवतार थे कृष्ण । श्रीराम के तरह वे मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं थे । उन्होंने अपने नियम स्वयं गढ़े , रास्ते स्वयं चुने । वे खुद सीमाओं में बंधे नहीं , हाँ वक्त और तमाम ग्रह उनके इशारों पर बंधे । कृष्ण के अपने नियम थे , अपने कानून । वे भक्तवत्सल थे , चतुरसुजान भी , पर नीतिवान भी । वे पूर्ण पुरुष थे , करुणानिधान भी । वे खुद अलौकिक थे पर माखन चुरैया भी । वे रण चितेरे थे पर बंसी बजैया भी । वे गोपियों के मितवा थे , पर जगत रखैया भी ।
पर वे थे कहाँ ? वे तो हैं । चारों युग पार न पावैं जब बृजनंदन पार लगावैं । वे कृष्ण कन्हैया हैं , चितचोर हैं । ठहरे तो रुके रहे , चल पड़े तो फिर मुड़े नहीं । जहां से चल दिये , फिर लौटे नहीं । राधा के हो गए पर राधा के हुए नहीं । रुक्मणि को ले चले पर रुक्मण से बंधे नहीं ।
उन्हीं गिरिधर मुरलीधर का आज जन्मोत्सव । बधाइयां दीजिये भी लीजिये भी । गीता के सूत्रधार भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाइए । इस पावन भारतभूमि को फिर से बृज धूलि से सजाइये । नंद के नटखट लाला को पालने झुलाइये ।
तुम दिगन्त हो हे कृष्ण
गोपाला हो नंदलाला हो
तुम अनंत हो हे कृष्ण
आज फिर आओ
बड़े संकट में हैं धरतीवासी
चारों ओर मच रहा हाहाकर
सिसक रही मानवता
डरा रही दानवता
कृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं स्वीकारिए
प्रार्थना कीजिये कि
अत्याचारियों के दमन को
इस धराधाम पर वे फिर आएं
~ Kaushal Sikhaula जी की फेसबुक वाल से

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