Friday, March 30, 2012

" भगवा का महत्व "

 
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    भगवा ध्वज भारत का ऐतिहासिक एवं सांस्कृति ध्वज है।  यह     त्याग, बलिदान, ज्ञान, शुद्धता एवं सेवा का प्रतीक है। 
    भगवा ध्वज दो त्रिकोणों से मिलकर बना है जिसमें से उपर वाला   त्रिकोण नीचे वाले त्रिकोण से छोटा होता है। ध्वज का भगवा रंग     उगते हुए सूर्य का रंग है; आग का रंग है। उगते सूर्य का रंग और     उसे ज्ञान, वीरता का प्रतीक माना गया और इसीलिए हमारे पूर्वजों     ने इसे इसे प्रेरणा स्वरूप माना। 
यह हिन्दुस्तानी संस्कृति का शास्वत सर्वमान्य प्रतीक है। हजारों हजारों सालों से भारत के शूरवीरों ने इसी भगवा ध्वज की छाया में लड़कर देश की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर किये। भगवा ध्वज, हिन्दू संस्कृति एवं धर्म का शाश्वत प्रतीक है। यही ध्वज सभी मन्दिरों, आश्रमों में लगता है। शिवाजी की सेना का यही ध्वज था; राम, कृष्ण और अर्जुन के रथों का यही ध्वज है।
कलर थैरेपी के मुताबिक केसरिया रंग सम्पन्नता का प्रतीक है। यह रंग आंखों पर विशेष प्रभाव डालता है, जो हमारे व्यवहार में शांति और आनंद की बढ़ोतरी करता है। यह प्रसन्नता बढ़ाता है। केसरिया रंग पहनने वाले लोगों को गुस्सा भी कम आता है। यह हमें भीतर से सम्पन्न बनाता है।
दूसरा कारण ज्योतिष से संबंधित है। ज्योतिष में पीला या इससे बनने वाले रंग बृहस्पति के माने गए हैं। बृहस्पति ज्ञान के देवता है, सन्यासी हमेशा ज्ञान की साधना में लीन रहते हैं। यह रंग उन्हें इस काम में सहायता देता है। बृहस्पति ग्रह भी इस रंग से प्रसन्न होते हैं और इस रंग को पहनने वाले पर विशेष कृपा करते हैं। इस रंग की बदौलत सन्यासियों को ज्ञान अर्जन और संसार में धर्म के ज्ञान के प्रचार में सहायता मिलती है।
 
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