Thursday, October 10, 2013

नवरात्र - नयी पीढ़ी के लिए जानकारी

सनातन धर्म में दो बार नवरात्र मनाये जाते हैं। अक्टूबर - नवम्बर में शारदीय नवरात्र और मार्च - अप्रैल में बासंतिक नवरात्र । नयी पीढ़ी के मन में बहुत सारे सवाल रहते हैं कि नवरात्र क्यूँ मनाये जाते हैं ? नवरात्र में पूजा का सही विधान क्या है ? व्रत रखें या नहीं? आदि आदि... मैंने इस तरह के सभी प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास किया है। आशा है , नयी पीढ़ी को पूर्ण जानकारी मिलेगी। यह जानकारी प्रतिष्ठित ज्योतिषी श्री डा. सुरेश चन्द्र मिश्र से बातचीत पर आधारित है ।

नवरात्र क्यों मानते हैं ?

एक साल में दो गोल संधियाँ होती हैं - (1) उत्तरायण - दक्षिणायन (2) उत्तर - दक्षिण| ये दो गोल संधियाँ मिलकर साल में चार पर्व-गांठ (जोड़ या संधि) हैं| इन गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र होते हैं | अब अगर आयुर्वेद के अनुसार  देखें तो इन गोल संधियों को आयुर्वेद में "यमराज के जबड़े" कहा जाता है जिसमे मौसम के अनुसार रोग आदि होने की सम्भावना सबसे ज्यादा होती है | इसलिए ऐसे मौसमों में तन-मन को स्वस्थ रखने के लिए व्रत रखने का विधान है |

नवरात्र नौ ही क्यों हैं?

मुह, नाक, कान, आँख, मूत्र और मलद्वार आदि मिलकर हमारे शरीर में नौ द्वार या छिद्र हैं, जिनके माध्यम से हमारा शरीर क्रियाशील है | अतः देर से पचने वाला, भारी, तमोगुणी भोजन छोड़कर कम मात्रा में भोजन का नियम बनाया गया है| हो सके तो एक समय फल, दूध, दही, और ऋषियों के अनाज जैसे श्यामाक चावल, कुट्टू, चौलाई, सिंघाड़ा आदि खाने का नियम बनाना चाहिए| इससे नौ द्वारों की शुद्धि होती है | इस तरह शरीर की शुद्धि को व्यक्तिगत तौर पर महत्त्व देने के लिए नौ दिन का महत्व दिया गया है | फिर इन नौ दिनों को नौ दुर्गाओं से जोड़ा गया है |

नवदुर्गा क्या हैं ?

हिंदी महीने के शुक्लपक्ष की पड़वा यानी पहली तिथि से नौवीं तिथि तक हर दिन को नौ देवियों से जोड़ा गया है| हर दिन की एक देवी यानी नौ द्वारों वाले किले या दुर्ग के भीतर बसने वाली जीवन शक्ति रुपी दुर्गा के नौ रूप हैं - शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंध्माता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री |
इसी प्रकार इन नौ देवियों का नौ जड़ी-बूटी या ख़ास व्रत की चीज़ों से भी सम्बन्ध है| यह चीज़ें नवरात्र के व्रत में प्रयोग की जाती हैं| यह चीज़ें - कुट्टू, दूध, दही, चौलाई, पेठा, श्यामाक चावल, हरी तरकारी, काली मिर्च, तुलसी, साबूदाना, आंवला आदि कुदरती और जंगल में पैदा होने व्रत खाद्य हैं|

व्रत क्यों रखें ?

शरीर को सुचारू रूप से रखने के लिए सफाई या शुद्धि तो हम रोजाना करते ही हैं लेकिन कभी इसके अंग-प्रत्यंगो की पूरी देखभाल करनी भी जरुरी है| इसके लिए हर छमाही पर व्रत रखकर भीतरी सफाई का अभियान चलाया जाता है| व्रत में सात्विक आहार से शरीर की शुद्धि, साफ़ शरीर में शुद्ध बुद्धि,  उससे बुद्धि में उत्तम विचार, अच्छे विचारों से उत्तम कर्म और कर्म से अच्छा चरित्र बनता है| 

यदि व्रत न रख सकें |

 व्रत संकल्प, प्रतिज्ञा, नियम, या प्रण का नाम है| यदि नौकरी आदि की दिनचर्या या अपने शरीर की स्थिति के कारण सारे व्रत न रख सकें तो सुबिधानुसार 9, 7, 5, 3 या 1 व्रत रख सकते हैं| यदि एक भी व्रत न रख सकें तो इन दिनों कम से कम शरीर के अधिक सुखभोग से बचें| जैसे - अच्छी बातें बोलें, खान-पान पर नियंत्रण रखें, किसी को गलत न बोलें या गलत न करें, मन में अच्छे विचार रखें, समय पर खाना-पीना और सोना |

यदि कन्याओं को भोजन न करा सकें |

अकेले रहने या काम के घंटों के कारण कन्याओं को पूरी विधि से बैठाकर भोजन कराना संभव न हो तो आप सुविधानुसार कन्याओं को तैयार भोज्य पदार्थों को भेंट कर सकते हैं |

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