प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से विश्व में पर्यावरण को संकट उत्पन्न हो गया है। स्वस्थ समाज के लिए साफ वातावरण जरूरी है लेकिन कुछ साल से लोग विकास की अंधी दौड़ और अत्याधुनिक संसाधनों की होड़ में पर्यावरण के महत्व व जीवन में इसकी जरूरत को भूल रहे हैं। हिमाचल के दूरदराज के क्षेत्र जहां कुछ लोग ही पहुंच पाते थे, वहां आज वाहनों की रेलमपेल है। नतीजतन उन पहाड़ी क्षेत्रों में प्रदूषण स्तर बढ़ना चिंताजनक है। रोहतांग को धरती का स्वर्ग समझा जाता था, लेकिन वहां की बर्फ पर प्रदूषण के दाग नजर आने लगे हैं। स्वच्छ वायु मानव जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है और इसके अभाव में जीवन का संकट उत्पन्न हो जाता है। ऐसे में अगर हम पर्यावरण संरक्षण के प्रति समय रहते जागरूक नहीं हुए तो धरती पर जीवन का संकट में आना तय है। आंकड़े बताते हैं कि 2050 तक वातावरण में इतना जहर फैल चुका होगा कि हर साल करीब 36 लाख लोग काल के ग्रास बनेंगे। इन आकंड़ों में इस बात का भी जिक्र है कि वायु प्रदूषण का सबसे अधिक असर भारत व चीन जैसे देशों में देखने को मिलेगा। इस बीच पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर कुल्लू जिला प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदम सराहनीय हैं। इसके तहत रोहतांग दर्रे पर पर्यटन से संबंधित सभी गतिविधियां नियंत्रित की जाएंगी। दस साल से पुराने वाहन वशिष्ट से आगे नहीं जा पाएंगे। वशिष्ट में सभी वाहनों की प्रदूषण जांच होगी। रोहतांग जाने के लिए वाहन चालकों को जिला प्रशासन से विशेष परमिट लेना होगा। वशिष्ट से आगे चार साल पुराने स्नो कटर भी नहीं जा पाएंगे। मढ़ी में ईको फ्रेंडली मार्केट का निर्माण किया जाएगा। नि:संदेह यह कदम पर्यावरण संरक्षण के लिए अहम है लेकिन इन्हें सही तरह से अमल में लाया जाना चाहिए। इसमें किसी तरह की कोताही न बरती जाए। अगर थोड़ी सी भी ढील दी गई तो सारे प्रयास व्यर्थ हो जाएंगे। यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदूषण जांच केंद्र में काम सही तरीके से हो। प्रशासन को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मर्म को गंभीरता से समझना होगा और सही मायने में प्रदूषण रोकने के लिए आगे आना होगा। इसके लिए संबंधित पक्षों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्हें समझना होगा कि इस निर्देश का पालन कर वे सिर्फ अपनी ड्यूटी नहीं बल्कि भविष्य के लिए लिए प्रयास कर रहे हैं ताकि लोग स्वस्थ जीवन जी सकें।
~ साभार - जागरण - हिमाचल प्रदेश
~ साभार - जागरण - हिमाचल प्रदेश
प्रशासन की कार्यवाही तो होगी ही लेकिन इससे पहले लोगो को अपनी जिम्मेवारी समझनी जरूरी है क्यूंकी लोग जब कहीं घूमने जाते हैं तो प्लास्टिक की बोतले और प्लास्टिक बैग इस्तेमाल करते हैं जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है। हमे अपने ज़िम्मेदारी समझते हुए प्लास्टिक चीजों का उपयोग या तो नहीं करना चाहिए और अगर करना भी पड़े तो प्लास्टिक का अधिकतम प्रयोग करके हम पर्यावरण को सुरक्षित रखने मे सहयोग कर सकते हैं। अपने आस पास के वातावरण को आंपने घर की तरह स्वच्छ रखेँ तथा यही आदत जहां जाए वहाँ भी अपनाए।
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