अंग्रेज गए और अपने लोगों का राज हो गया लेकिन तंत्र हमारा कहाँ है ? हमारा संविधान 1935 में अंग्रेज सरकार द्वारा साम्राज्यवादी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बनाये गए "भारत प्रशासन कानून" का ही परिवर्धित रूप है |
जबकि 1935 में बने भारत प्रशासन कानून के बारे में महात्मा गाँधी ने सन 1936 में कुमारी हेरिसन को लिखे पत्र में बड़े स्पष्ट रूप में स्वीकार किया है कि ' अगर मेरा बस चले तो मैं इस संविधान को आज ही नष्ट कर दूं | इसमें ऐसी कोई चीज़ नहीं है , जो मुझे पसंद हो| लेकिन जवाहर लाल का रास्ता मुझसे भिन्न है |'
सन 1953 में राज्यसभा में भाषण देते हुए संविधान निर्माता डा. अम्बेडकर ने कहा था ' लोग कहते हैं कि आपने संविधान बनाया | तो मेरा कहना है कि मैं तो भाड़े का टट्टू था मुझसे जो कहा गया मैंने किया, अपनी इच्छा के विरुद्ध किया |'
अब आप सोच लीजिए कि इतने वर्षों में भी वही सारी व्यवस्थाएं ज्यों की त्यों चल रही हैं जो ब्रिटिशों ने लागू की थी | हम स्वाधीन हुए ,स्वतंत्र नहीं !!!!!!!!!!!
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